Gurudev Ojaswi Sharma Ji

Spiritual Path : Emotions and Intellect

7 min · 26. juni 2026
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Spiritual Path : Emotions and Intellect

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episode ।। साधना के भिन्न भिन्न तरीके ।। cover

।। साधना के भिन्न भिन्न तरीके ।।

* सत्कर्म कभी नहीं रोकने और बुरा कभी करना नहीं * कुछ साधक ऐसे है जिनके सारे काम हो चुके, उनको अपना समय अधिक से अधिक भगवत भजन में लगाना चाहिए * साधना में नियमितता बहुत महत्व की बात है * दूसरा वर्ग है जो दफ्तर में या कही और काम करते है, वे यह सोचें कि सभी काम भगवान के * किसी को कभी कष्ट नहीं पहुंचना चाहिए * किस नीयत से काम करा जा रहा है यह सबसे महत्वपूर्ण बात है * बच्चों का भजन है पढ़ाई करना, घर के कार्यों में हाथ बटाना * कोई भी कार्य छोटा नहीं है * बच्चों को बड़ा आदमी नहीं बनाना, अच्छा आदमी बनने के लिए प्रेरित करो * कुछ और ना बने तो अंदर ही अंदर जप करते रहो * जीवन में गलती हो जाये तो भगवान से प्रार्थना करो, वे बड़े दयालु हैं

14. juli 202616 min
episode ।। प्रवचन पूरी श्रद्धा से सुनो ।। cover

।। प्रवचन पूरी श्रद्धा से सुनो ।।

* जब भी किसी सत्संग में जाओ, श्रद्धा से सुनो, और जो बात समझ में न आये उसको सोचो कि बात तो ठीक ही कही गई है, अभी मेरी समझ में नही आई * जांचते रहोगे तो विकास नहीं होगा * सिर झुकाए बिना अहम समाप्त नहीं होगा * ' है ' माने परमात्मा * सारे प्रयास इस बात को गलाने के लिए है, कि मैं शरीर हूँ * जैसी जिसके विकास की आवश्यकता है, भगवान उसके लिए ऐसी ही परिस्थिति भेजदते है * शिष्य बनना बड़ा कठिन काम, क्योंकि मन को मारना पड़ता है * आखिरी बात है - " सिया राम मैं सब जग जानी करहु प्रणाम " * हर एक के माध्यम से भगवान ही मदद करते हैं। सब जगह भगवान की ही लीला चल रही है * भगवान से कृपा की प्रार्थना करते रहो

13. juli 202617 min
episode ।। दैनिक साधना का महत्व ।। cover

।। दैनिक साधना का महत्व ।।

* जो व्यक्ति दूसरे का जितना ध्यान जीवन में रख कर चलता है, वो उतना ही भगवान के निकट होता है * धर्म के दस लक्षण मनु स्मृति में * पहला लक्षण - धैर्य * दूसरा - क्षमा * तीसरा - दम * चौथा - आस्ते ( चोरी न करना ) * पांचवा - शौंच * छठा - इंद्रियों को वश में रखना * सातवां - सात्विक बुद्धि * आठवां - सात्विक ज्ञान * नौवा - सत्य वचन * दसवां - क्रोध न करना * सच्चा साधक २४ घंटे का _ हर समय अपने ऊपर निगाह * वही काम करते हुए नीयत बदलनी है * सांसारिक जीवन और आध्यात्मिक जीवन में कोई भेद नहीं * ऐसा नहीं है कि साधक को जीवन में ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है * अनंत जन्मों का मैल निकलता है * इस संसार में पतन होने की चेष्टा करने की आवश्यकता नहीं है। पतन तो होगा , यदि उत्थान की चेष्टा नहीं करी तो * इस लिए रोज ध्यान रोज भजन, जो साधना है रोज करे जाओ * तुम फंस गये, अब भाग नहीं सकते * आत्मा क्या है? इसको समझने की कोशिश मत करो, तुम्हें समझ में आयेगा नहीं। बस मान लो * अनंत आत्मा के महा-सागर में लहरें उठ रही है। लहर का अलग होने का भ्रम मुश्य शरीर में आकर ही खत्म होता है

26. juni 202635 min