Harmonized_Words

कुछ बाक़ी हैं!

2 min · 4. dec. 2020
episode कुछ बाक़ी हैं! cover

Beskrivelse

जिंदगी के किसी मोड़ पर जब निराशा के बादल छा जाते हैैं तब कहीं सूरज की किरण उन बादलों को छाट कर हौले से आकर कहती हैं कुछ बाक़ी हैं..... क्योंकि चलते रहने का ही तो नाम हैं ज़िन्दगी!

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3 episoder

episode "आख़िरी चाय" cover

"आख़िरी चाय"

कितना अजीब शब्द हैं न "आख़िरी" जैसे इसके होने में कभी खुशी है तो कभी गम, कभी विरह हैं तो कभी मिलन... कभी न कभी आपने भी कोई शाम किसी अपने के साथ एक चाय की चुस्की ली तो होगी, अगर वो आख़िरी थी तो आप इस कविता से ज़रूर उस लम्हें को याद कर पाएंगे और अगर कभी कोई आख़िरी चाय नहीं हुई हैं तो उम्मीद करूंगी आपकी अपने अपनो के साथ हर चाय आबाद रहें......

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