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“मैं तुझे फिर मिलूँगी… कहाँ — कैसे — पता नहीं शायद तेरे ख्यालों की ख़ुशबू बन कर… तेरे मन की तहों में उतर जाऊँगी।” क्या आपने कभी किसी किताब को महसूस किया है? अमृता प्रीतम यहाँ एक लेखिका ही नहीं—एक बेटी हैं, जो माँ की मौत के बाद भी जीना सीख रही है... एक प्रेमिका हैं, जो साहिर की ख़ामोशी से टूटती रही और इमरोज़ की मौजूदगी में खुद को जोड़ती रही... और एक इंसान हैं, जो समाज की हर सीमा को लांघ कर भी अपने सच से समझौता नहीं करती। रसीदी टिकट हर उस इंसान की किताब है जो कभी टूटा है... और अपने आप को जोड़ रहा है। तो जुड़े रहिए हमारे साथ क्योंकि हम लेकर आ रहे हैं अमृता प्रीतम जी की आत्मकथा- रसीदी टिकट और सुनते रहिए अपनी मनकी आँखों से — सुनो ज़रा Suno Zaraaa लेकर आ रहा है Amrita Pritam की आत्मकथा — रसीदी टिकट — जल्द ही एक soulful audiobook के रूप में। #audiobook #sunozaraaa #lovestories #shayari #ghazal #slow #love #romantic #amritapritam Like, Share & Subscribe to RAASA STUDIO for more such soulful stories
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