Gurudev Ojaswi Sharma Ji
* जब तक राजसिकता की प्रधानता रहती है तब तक नए-नए कर्म, और ज्यादा फायदा का उद्देश्य रखकर किए जाते हैं * जब तक नए-नए कर्मों में ही उलझोगे तो जीवन में सुलझोगे कब * जो " तुम " हो तुम तो शुद्ध ही हो, तुम्हें बस अभी समझ नहीं आ रहा कि तुम शुद्ध ही हो * जप करते रहो, वह फिर स्मरण बन जाएगा, फिर उनकी कृपा से प्रेम हो जाएगा
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