Gurudev Ojaswi Sharma Ji
* बईमानी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए * प्रारब्ध तो तय है, परंतु, तुम्हारी नियत, तुम्हारा प्रयत्न, तुम्हारा भाव और प्रारब्ध यह आपस में टकराते हैं
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।। यहां कुछ गलत नहीं है ।।
* जीवात्मा के विकास में अनेक stages है * धीरे धीरे ये प्रकट होगा कि यहां कुछ भी गलत नहीं हो रहा है * यहां केवल भगवान ही है इस पर आना है * न्यूज में तो अधिकतर नेगेटिव बाते होती हैं * हर किसी के साथ जो हो रहा है - वह सब प्रारब्ध से है * कैसा भी प्रारब्ध आ जाए, आत्मज्ञान के घटने की संभावना हर समय है * हर समय सब प्रकार के लोग होते है * अपने हिस्से में जो कर्तव्य आया है इसको करते रहो, प्रभु का संसार है, बाकी सब वो देख लेंगे * बाधाओं को भी साधन बना लो - तब विकास होता है * प्रार्थना करते रहो - प्रभु इस बार तो पूर्ण कृपा कर दो * सब काम बन जाएगा - जब जन्म ही इस बात के लिए मिला है
।। भगवत प्राप्ति तुरंत।।
।। सात्विक अहंकार ।।
* सात्विकता के अधिक होने का प्रयास करो, परंतु सात्विक प्रधान में " मुझे ज्ञान हो गया " यह भ्रम हो जाता है * गुरु बनने की ललक बड़ी खतरनाक * सात्विकता बढ़ने पर कई सिद्धियाँ आ जाती है * तीन इच्छाएं प्रमुख होती है - करने की जानने की पाने की * त्रिगुणतीत के लिए प्रकृति के गुण प्रभावहीन हो जाते है * समाधि का अर्थ है जिसकी बुद्धि समता में आ जय * समर्पण घटने पर सब बन जाता है
।। आधुनिक भौतिक उन्नति से दुर्गति ।।
।। जो जन्मा है-उसे मरना भी पड़ेगा ।।
* मृत्यु के समय बड़ा भारी पश्चाताप होता है * यह मानव शरीर केवल आत्मज्ञान के लिए मिला है * इस बात के लिए ही पूरे जीवन प्रयत्न * घर छोड़ कर आश्रम मत चले जाना * अपने कर्तव्य को करते हुए यह लक्ष्य प्राप्त हो जाता है * वासनाएं रुकावट डालती है, भगवत गीता से जुड़े रहने से ये हार जाएंगी * अपने दोष और दूसरो के गुण देखो * गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड के नाम पर कामवासना की पूर्ति गलत * जागो और कुछ शरम करो * इंसान बनना सब से मुश्किल काम है
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