Gurudev Ojaswi Sharma Ji
* जब भी किसी सत्संग में जाओ, श्रद्धा से सुनो, और जो बात समझ में न आये उसको सोचो कि बात तो ठीक ही कही गई है, अभी मेरी समझ में नही आई * जांचते रहोगे तो विकास नहीं होगा * सिर झुकाए बिना अहम समाप्त नहीं होगा * ' है ' माने परमात्मा * सारे प्रयास इस बात को गलाने के लिए है, कि मैं शरीर हूँ * जैसी जिसके विकास की आवश्यकता है, भगवान उसके लिए ऐसी ही परिस्थिति भेजदते है * शिष्य बनना बड़ा कठिन काम, क्योंकि मन को मारना पड़ता है * आखिरी बात है - " सिया राम मैं सब जग जानी करहु प्रणाम " * हर एक के माध्यम से भगवान ही मदद करते हैं। सब जगह भगवान की ही लीला चल रही है * भगवान से कृपा की प्रार्थना करते रहो
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