Harmonized_Words

कुछ बाक़ी हैं!

2 min · 4 dec 2020
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जिंदगी के किसी मोड़ पर जब निराशा के बादल छा जाते हैैं तब कहीं सूरज की किरण उन बादलों को छाट कर हौले से आकर कहती हैं कुछ बाक़ी हैं..... क्योंकि चलते रहने का ही तो नाम हैं ज़िन्दगी!

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aflevering "आख़िरी चाय" artwork

"आख़िरी चाय"

कितना अजीब शब्द हैं न "आख़िरी" जैसे इसके होने में कभी खुशी है तो कभी गम, कभी विरह हैं तो कभी मिलन... कभी न कभी आपने भी कोई शाम किसी अपने के साथ एक चाय की चुस्की ली तो होगी, अगर वो आख़िरी थी तो आप इस कविता से ज़रूर उस लम्हें को याद कर पाएंगे और अगर कभी कोई आख़िरी चाय नहीं हुई हैं तो उम्मीद करूंगी आपकी अपने अपनो के साथ हर चाय आबाद रहें......

19 nov 20222 min