Mahantyagi Baba Jumdevji Biography. Jumdevji Tubrikar.
Biography of Shri Baba Jumdevji
भारत के इतिहास में ऐसे कई महान संत हो गए जिन्होंने समाज के लिए कुछ ऐसा अनोखा कार्य किया जिसके कारण उनका नाम आज भी बड़े आदर पूर्वक लिया जाता है. आज हम आपको ऐसे महान त्यागी श्री बाबा जुमदेवजी की जीवन कहानी बताने वाले हैं जिनके अतुलनीय लोक कल्याण कार्यों के कारण हर समाज के लोग उन्हें अपना आदर्श मानते हैं.
Shri Baba Jumdevji
श्री बाबा जुमदेवजी का जन्म 3 अप्रैल 1921 को नागपुर जिले के गोलीबार चौक नामक एरिया में एक गरीब परिवार में हुआ था.
इनका असली नाम श्री जुमनजी तुबरीकर था.
इनके पिताजी का नाम श्री विठोबा तुबरीकर और माता जी का नाम श्रीमती सरस्वती बाई तुबरीकर था.
कोष्टि समाज में पैदा होने के कारण इनके पिता का खानदानी व्यवसाय बुनकर था और माता एक गृहिणी थी.
अपने परिवार के पांच भाइयों में वह चौथे नंबर के थे इनके तीन बड़े भाइयों का नाम बालकृष्ण, नारायण , जागोबा और छोटे भाई का नाम मारुति था.
उन दिनों बाबा के घर की परिस्थिति बहुत गरीबी की होने के कारण वह अपनी शालेय शिक्षा सिर्फ चौथी तक ही पूरी कर पाए.
बाबा बचपन से ही हनुमान भक्त होने के कारण उन्हें पहलवानी का शौक था, वह रोजाना घर के पास बने एक अखाड़े में कसरत करने जाया करते थे. जिसके कारण बाबा मन के साथ–साथ शरीर के भी उतने ही मजबूत थे.
इनका विवाह वाराणसी बाई से साल 1938 में हुआ था, जब बाबा मात्र 17 साल के थे.
इसके बाद शुरुआती दिनों में बाबा ने अपना खानदानी व्यवसाय बुनकर छोड़कर सेठ केजरीवाल गोल्ड फर्म में नौकरी की थी.
बाबा ने पूरे समाज के सामने परमात्मा एक है कि संकल्पना रखी.
महानत्यागी बाबा जुमदेवजी ने त्याग , समर्पण और मानवता का संदेश पूरी दुनिया को देने के कारण नागपुर, महाराष्ट्र , मध्य प्रदेश समेत पूरे देश और विदेश में इनके भक्तगण और चाहने वाले हैं.
पूरे विश्व से इन के अनुयाई होने के बावजूद बाबा ने खुद को हमेशा ही ईश्वर का सेवक ही समझा.
बाबा ने पूरे समाज को नशा मुक्ति ,मानवता धर्म परमार्थ और स्वच्छता अपनाने का संदेश दिया.
बाबा का समाज उद्बोधन का कार्य देखकर समाज के हर जाति , धर्म के लोग उनके साथ जुड़ गए. जिसके कारण उन्होंने 4 दिसंबर 1969 को परम पूज्य परमात्मा एक सेवक मंडल की स्थापना नागपुर में की.
परम पूज्य बाबा ने समाज में चल रहे कुप्रथा जैसे बाल विवाह, दहेज, जात–पात, ऊंच–नीच, चोरी, शराब नशा जैसे बुरी चीजों से लोगों को बाहर निकाला.
समाज के सभी लड़कियों को शिक्षित होकर अपने पैरों के ऊपर खड़े होने का महत्वपूर्ण संदेश दिया जिसके कारण उनका आत्मसम्मान बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य बाबा ने किया.
बाबा के दिखाए हुए मानवता धर्म पर चलने वाले उनके अनुयाई की संख्या भारत से लेकर अनेक देश विदेश में होने के कारण एक करोड़ से भी ज्यादा है.
बाबा ने लोगों का प्रबोधनकर अंधविश्वास, बुआ बाजी से बाहर निकाल कर उन्हें शिक्षा से आत्मनिर्भर होने का मार्ग दिखाएं दिखलाया.
बाबा ने किसानों के लिए, पिछड़े वर्ग और गरीब लोगों को मदद करने के लिए “परमात्मा एक” नाम की एक छोटी बैंक की स्थापना साल 1976 को नागपुर में की.
साथ में बाबा ने लोक कल्याण के हेतु इन संस्थाओं की भी स्थापना की.
परमात्मा एक सेवक मानवता धर्म आश्रम, मौदा
परमात्मा एक बहुउद्देशीय ग्राहक भंडार, नागपुर
परमात्मा एक दूध उत्पादक सहकारी संस्था रामटेक और भंडारा जिला
परमात्मा एक धर्मार्थ दवाखाना, भंडारा और नागपुर
बाबा के इन महान कार्यों की दखल भारत सरकार ने भी ली और इन के सम्मान में तारीख 30/ सितंबर/2013 को गोंदिया जिले में आयोजित एक भव्य दिव्य समारोह में तत्कालीन भारत के उपराष्ट्रपति श्री. हामिद अंसारी के हाथों बाबा जुमदेव नाम का एक पोस्टल स्टैंप टिकट जारी किया गया. इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल श्री के. शंकर नारायण तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री प्रफुल्ल पटेल समय कई बड़े नेता उपस्थित थे.
ऐसे महान त्यागी बाबा जुमदेवजी का निर्वाण तारीख 3/ अक्टूबर/1996 को नागपुर में हुआ.
महान त्यागी श्री बाबा जुमदेवजी के अतुलनीय और अद्वितीय प्रभावशाली समाज कार्य के लिए हम उन्हें दिल से शत–शत प्रणाम करते हैं.
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