Gurudev Ojaswi Sharma Ji
* स्वामी रामसुखदास जी का पद, वाणी * गुरुदेव जी की वाणी
Sei die erste Person, die kommentiert
Melde dich jetzt an und werde Teil der Gurudev Ojaswi Sharma Ji-Community!
Dann 4,99 € / Monat · Jederzeit kündbar.
186 Folgen
।। सब के गुरु परमात्मा।|
* सिद्धियों में मत फंस जाना, केवल परमात्मा * इस देश की और संस्कृति की कोई सीमा नहीं है, हर क्षेत्र में हमारे पूर्वजों ने अनेक प्रयोग किये * जिस मार्ग पर चल पड़े फिर उसको पूरा आखिर तक चलो * निषेधात्मक मार्ग से अनुभव होता है, पर इस झंझट में मत पड़ो . 10 minute meditation . * सभी इच्छाओं का अंत दुख में होता है * यदि कोई इच्छा उत्पन्न हो जाए तो उसे दृष्टा भाव से देखो * तुम हो, मैं हु और तुम्हारे चरणों में हु * तुम पक्का रखो के ये आखरी जनम है
।। यहां कुछ गलत नहीं है ।।
* जीवात्मा के विकास में अनेक stages है * धीरे धीरे ये प्रकट होगा कि यहां कुछ भी गलत नहीं हो रहा है * यहां केवल भगवान ही है इस पर आना है * न्यूज में तो अधिकतर नेगेटिव बाते होती हैं * हर किसी के साथ जो हो रहा है - वह सब प्रारब्ध से है * कैसा भी प्रारब्ध आ जाए, आत्मज्ञान के घटने की संभावना हर समय है * हर समय सब प्रकार के लोग होते है * अपने हिस्से में जो कर्तव्य आया है इसको करते रहो, प्रभु का संसार है, बाकी सब वो देख लेंगे * बाधाओं को भी साधन बना लो - तब विकास होता है * प्रार्थना करते रहो - प्रभु इस बार तो पूर्ण कृपा कर दो * सब काम बन जाएगा - जब जन्म ही इस बात के लिए मिला है
।। भगवत प्राप्ति तुरंत।।
।। सात्विक अहंकार ।।
* सात्विकता के अधिक होने का प्रयास करो, परंतु सात्विक प्रधान में " मुझे ज्ञान हो गया " यह भ्रम हो जाता है * गुरु बनने की ललक बड़ी खतरनाक * सात्विकता बढ़ने पर कई सिद्धियाँ आ जाती है * तीन इच्छाएं प्रमुख होती है - करने की जानने की पाने की * त्रिगुणतीत के लिए प्रकृति के गुण प्रभावहीन हो जाते है * समाधि का अर्थ है जिसकी बुद्धि समता में आ जय * समर्पण घटने पर सब बन जाता है
।। आधुनिक भौतिक उन्नति से दुर्गति ।।
Kommentare
0Sei die erste Person, die kommentiert
Melde dich jetzt an und werde Teil der Gurudev Ojaswi Sharma Ji-Community!