भजन - कीर्तन - आरती
ऐसो को उदार जग माहीं । बिनु सेवा जो द्रवै दीन पर, राम सरस कोउ नाहीं ॥ जो गति जोग बिराग जतन करि, नहिं पावत मुनि ज्ञानी । सो गति देत गीध सबरी कहँ, प्रभु न बहुत जिय जानी ॥ जो संपति दस सीस अरप करि, रावण सिव पहँ लीन्हीं । सो संपदा विभीषण कहँ अति सकुच-सहित हरि दीन्हीं ॥ तुलसीदास सब भांति सकल सुख जो चाहसि मन मेरो । तो भजु राम, काम सब पूरन करहि कृपानिधि तेरो ॥ Listen to Bhajan sung by Dr. Uma Shrivastava by clicking here. [https://archive.org/download/Bhajans-Uma/%E0%A4%90%E0%A4%B8%E0%A5%8B%20%E0%A4%95%E0%A5%8B%20%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%9C%E0%A4%97%20%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%80%20%E2%80%94%20%E0%A4%89%E0%A4%AE%E0%A4%BE.m4a]
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