Harmonized_Words

"आख़िरी चाय"

2 min · 19 de nov de 2022
Portada del episodio "आख़िरी चाय"

Descripción

कितना अजीब शब्द हैं न "आख़िरी" जैसे इसके होने में कभी खुशी है तो कभी गम, कभी विरह हैं तो कभी मिलन... कभी न कभी आपने भी कोई शाम किसी अपने के साथ एक चाय की चुस्की ली तो होगी, अगर वो आख़िरी थी तो आप इस कविता से ज़रूर उस लम्हें को याद कर पाएंगे और अगर कभी कोई आख़िरी चाय नहीं हुई हैं तो उम्मीद करूंगी आपकी अपने अपनो के साथ हर चाय आबाद रहें......

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"आख़िरी चाय"

कितना अजीब शब्द हैं न "आख़िरी" जैसे इसके होने में कभी खुशी है तो कभी गम, कभी विरह हैं तो कभी मिलन... कभी न कभी आपने भी कोई शाम किसी अपने के साथ एक चाय की चुस्की ली तो होगी, अगर वो आख़िरी थी तो आप इस कविता से ज़रूर उस लम्हें को याद कर पाएंगे और अगर कभी कोई आख़िरी चाय नहीं हुई हैं तो उम्मीद करूंगी आपकी अपने अपनो के साथ हर चाय आबाद रहें......

19 de nov de 20222 min