Gurudev Ojaswi Sharma Ji
* सत्कर्म कभी नहीं रोकने और बुरा कभी करना नहीं * कुछ साधक ऐसे है जिनके सारे काम हो चुके, उनको अपना समय अधिक से अधिक भगवत भजन में लगाना चाहिए * साधना में नियमितता बहुत महत्व की बात है * दूसरा वर्ग है जो दफ्तर में या कही और काम करते है, वे यह सोचें कि सभी काम भगवान के * किसी को कभी कष्ट नहीं पहुंचना चाहिए * किस नीयत से काम करा जा रहा है यह सबसे महत्वपूर्ण बात है * बच्चों का भजन है पढ़ाई करना, घर के कार्यों में हाथ बटाना * कोई भी कार्य छोटा नहीं है * बच्चों को बड़ा आदमी नहीं बनाना, अच्छा आदमी बनने के लिए प्रेरित करो * कुछ और ना बने तो अंदर ही अंदर जप करते रहो * जीवन में गलती हो जाये तो भगवान से प्रार्थना करो, वे बड़े दयालु हैं
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