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Mehr Misra
कितने भी उतार चढ़ाव से ज़िन्दगी क्यों न गुज़रे, हम सभी के अनुभव कितने अद्वितीय होते हैं, फिर भी एक से। इस podcast के ज़रिये मैं अपनी ज़िन्दगी के कुछ ख़ास क्षण share कर रहा हूँ, क्या पता, आपको अपनी दिखे...
Episode 8 - उम्र कितनी बची है
आदमी और वक़्त की फ़ितरत यही है, एक समय के बाद दोनों गुज़र जाते हैं, और अगर मालूम है ये बात हम सभी को तो, कैसे कह दें? वक़्त है, और तेरी ज़रुरत नहीं है।
Episode 7 - एक लम्हां लगता है
प्यार ही ऐसा ज़ख़्म है, .. आदमी अकेला ख़ुद होता है, और एक ज़माना तन्हां लगता है।
Episode 6 - एक उतारी गयी कमीज़
"हर इंसान आपकी ज़िन्दगी से एक वक़्त के बाद चला जाता है, फिर चाहे वो मर के हो, ... या डर के, या फिर जी भर के..."
Episode 5 - कभी-कभी सोचता हूँ
कभी-कभी सोचता हूँ, कि उन दो बाहों के सिवा, जिनमे एक ख़्वाब, एक उम्मीद, थोड़ा सा जिस्म, थोड़ी सी नींद, एक भरोसा, और एक दिल समा जाए उससे ज़्यादा क़ीमती और नायाब क्या हो सकता है।
Episode 4 - कौन तय करेगा
ये एक ऐसे विरह का क़िस्सा है, जिसके एक हाथ पर प्यार लिखा था, और दुसरे पर समय। प्यार समय-समय पर बस समय मांगता रह गया, और यूँहीं समय गुज़र गया...